बुढ़ी दादी की कहानी (Budhi Dadi Ki Kahani)

बुढ़ी दादी की कहानी (Budhi Dadi Ki Kahani)

पहाड़ों की गोद में बसा हुआ एक छोटा सा गांव था, जहाँ हवा में खुशबू घुली रहती थी और नदियों का मीठा राग सुनाई देता था। इस गांव में रहती थीं बुढ़ी दादी। उनकी झुर्रियों से भरा चेहरा, सफेद बालों की चोटी और टिमटिमाती आँखें कहानियों का खजाना समेटे हुए थीं। शाम ढलते ही गांव के बच्चे बुढ़ी दादी के झोंपड़े के सामने इकट्ठा हो जाते। बुढ़ी दादी प्यार से उन्हें पास बिठातीं और कहानियों की दुनिया में ले चलतीं।

आज भी एक शाम बच्चों का टोल बुढ़ी दादी के सामने बैठा था।

“बुढ़ी दादी, कोई कहानी सुनाओ!” गुंजन ने आग्रह किया।

बुढ़ी दादी मुस्कुराईं और बोलीं, “आज सुनाती हूँ जादुई बगीचे की कहानी।”

बच्चों की आँखों में चमक आ गई। बुढ़ी दादी ने धीमी आवाज़ में कहानी सुनानी शुरू की:

पहाड़ों की तलहटी में एक जंगल था। उस जंगल के बीचोबीच छिपा था एक जादुई बगीचा। उसकी चारों तरफ ऊंची-ऊंची बेलें लदे पेड़ खड़े थे, जो किसी रहस्य की रक्षा कर रहे हों। इस बगीचे में हर तरह के फूल खिलते थे, जो रंग-बिरंगे होने के साथ ही मीठी खुशबू बिखेरते थे। बगीचे के बीचोंबीच एक छोटा सा तालाब था, जिसका पानी इतना साफ था कि उसमें तलहटी साफ दिखाई देती थी।

इस जादुई बगीचे की रक्षा करती थी परी रानी। परी रानी के सुनहरे बाल थे और उसकी पोशाक तितलियों के पंखों की तरह रंगीन थी। वह बगीचे के फूलों से बात करती थी, पेड़ों से हंसती थी और तालाब में मछलियों के साथ खेलती थी।

एक दिन गांव का एक छोटा लड़का, जिसका नाम था मोहन, जंगल में लकड़ी बटोरने गया। वह जंगल के अंदर ही अंदर चला गया और रास्ता भटक गया। शाम होने को आई, लेकिन मोहन को वापस आने का रास्ता नहीं मिला। डर के मारे वह रोने लगा। अचानक उसे तेज खुशबू महसूस हुई। वह खुशबू की तरफ चला और जादुई बगीचे तक पहुंच गया।

मोहन बगीचे के रंगीन फूलों और खूबसूरत दृश्य को देखकर दंग रह गया। तभी उसे एक मीठी आवाज सुनाई दी। “हैलो, तुम कौन हो?”

मोहन ने ऊपर देखा तो एक परी रानी खड़ी थी। वह डर गया और झुककर खड़ा हो गया।

परी रानी ने मुस्कुराते हुए पूछा, “तुम जंगल में कैसे खो गए?”

मोहन ने उसे अपनी सारी कहानी सुनाई। परी रानी ने उसे डरने को नहीं कहा। उसने उसे बगीचे में घुमाया और उसे जामुन, आम और लीची जैसे मीठे फल खिलाए। मोहन ने अपने जीवन में कभी इतने स्वादिष्ट फल नहीं खाए थे।

जब रात हो गई, तो परी रानी ने मोहन को एक कोमल फूल की पंखुड़ी पर सुला दिया। सुबह होते ही परी रानी ने मोहन को जंगल से बाहर निकालने में मदद की। उसने उसे गांव का रास्ता दिखाया और उसे बताया कि वह कभी भी वापस आ सकता है, लेकिन बगीचे के रहस्य के बारे में किसी को नहीं बताना है।

मोहन गांव लौट आया और अपनी मां को गले लगा लिया। उसने उन्हें जंगल में मिले जादुई बगीचे के बारे में कुछ नहीं बताया, लेकिन वह अक्सर जंगल में जाता और पेड़ों से फलों की तलाश करता था। कभी-कभी उसे परी रानी की मीठी आवाज भी सुनाई देती थी।

बुढ़ी दादी की कह

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